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गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ à¤à¤¸à¤¾ समय है, जिसमें हर कदम पर à¤à¤¹à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¤ बरतना बहà¥à¤¤ जरूरी होता है। इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में न सिरà¥à¤« गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ को अपने ऊपर, बलà¥à¤•ि गरà¥à¤à¤¸à¥à¤¥ शिशॠपर à¤à¥€ पूरा धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना चाहिà¤à¥¤ इसलिà¤, समय-समय पर गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ को कà¥à¤› जरूरी टेसà¥à¤Ÿ करवाने चाहिà¤, ताकि जचà¥à¤šà¤¾ और बचà¥à¤šà¤¾ दोनों सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ रहें, लेकिन कà¥à¤› महिलाà¤à¤‚ जानकारी के अà¤à¤¾à¤µ में ये टेसà¥à¤Ÿ नहीं करवाती हैं। इस कारण उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कई पà¥à¤°à¤•ार की समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का सामना करना पड़ सकता है। मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ के आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में हम बता रहे हैं कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान नियमित तौर पर कौन-कौन से टेसà¥à¤Ÿ करवाने चाहिà¤à¥¤
सबसे पहले हम बता रहे कि गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ होते ही चिकितà¥à¤¸à¤• के पास कब जाना चाहिà¤à¥¤
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के कितने दिन बाद डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाना चाहिà¤?
गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ होने का सबसे पहला संकेत शारीरिक संबंध के बाद पीरियडà¥à¤¸ का न आना हो सकता है। अगर किसी महिला को à¤à¤¸à¤¾ महसूस हो, तो घर में पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी टेसà¥à¤Ÿ किट से इस बात की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ करनी चाहिà¤à¥¤ साथ ही डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास चेकअप के लिठजाना चाहिà¤, लेकिन à¤à¤¾à¤°à¤¤ में कई महिलाà¤à¤‚ शरà¥à¤® के कारण डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास नहीं जाती। वहीं, कà¥à¤› महिलाà¤à¤‚ तब तक नहीं जातीं, जब तक कि कोई गंà¤à¥€à¤° शारीरिक समसà¥à¤¯à¤¾ न हो जाà¤à¥¤ घर में टेसà¥à¤Ÿ का परिणाम सकारातà¥à¤®à¤• आने के बाद à¤à¥€ डॉकà¥à¤Ÿà¤° फिर से टेसà¥à¤Ÿ की सलाह देते हैं, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि कई बार घर में किठटेसà¥à¤Ÿ की रिपोरà¥à¤Ÿ गलत à¤à¥€ हो सकती है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° निमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार से पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ कर सकते हैं (1) (2):
इस दौरान डॉकà¥à¤Ÿà¤° यूरिन या खून का टेसà¥à¤Ÿ करते हैं। इन टेसà¥à¤Ÿ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ डॉकà¥à¤Ÿà¤° हà¥à¤¯à¥‚मन कोरियोनिक गोनाडोटà¥à¤°à¥‹à¤ªà¤¿à¤¨ (à¤à¤šà¤¸à¥€à¤œà¥€) नामक हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ की मौजूदगी और उसके सà¥à¤¤à¤° का पता लगाते हैं। à¤à¤šà¤¸à¥€à¤œà¥€ हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ आमतौर पर गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ होने के बाद ही शरीर में बनता है।
यूरिन में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, शà¥à¤—र और किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार के संकà¥à¤°à¤®à¤£ का à¤à¥€ परीकà¥à¤·à¤£ किया जाता है।
जब गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ हो जाती है, तब नियत तारीख की गणना अंतिम मासिक धरà¥à¤® चकà¥à¤° की तारीख के आधार पर की जाती है।
जरूरत होने पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड à¤à¥€ कर सकते हैं। अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड से गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ व अनà¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का पता लगाया जा सकता है (3)।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ हो जाने पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° कई पà¥à¤°à¤•ार की सावधानियां बरतने को कहते हैं। साथ ही इस बात की सलाह à¤à¥€ देते हैं कि पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी में कà¥à¤¯à¤¾ खाà¤à¤‚ और कà¥à¤¯à¤¾ नहीं, ताकि गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ और à¤à¥à¤°à¥‚ण सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहें।
आगे हम गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान नियमित तौर पर किठजाने वाले टेसà¥à¤Ÿ के बारे में जानेंगे।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी के दौरान नियमित तौर पर कौन-कौन से टेसà¥à¤Ÿ होते हैं? |
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• तिमाही में कà¥à¤› जरूरी और नियमित टेसà¥à¤Ÿ किठजाते हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¥€à¤¨à¥‡à¤Ÿà¤² टेसà¥à¤Ÿ यानी पà¥à¤°à¤¸à¤µ पूरà¥à¤µ परीकà¥à¤·à¤£ कहते हैं। इसके तहत कई तरह के टेसà¥à¤Ÿ होते हैं, जो जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° पहली और दूसरी तिमाही में किठजाते हैं। ये टेसà¥à¤Ÿ मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से à¤à¥à¤°à¥‚ण का विकास और सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ चेक करने के लिठकिठजाते हैं। इनके जरिठकिसी à¤à¥€ तरह के जोखिम का अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ लगाया जा सकता है। इन जोखिम की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ होने पर आगे कà¥à¤› और टेसà¥à¤Ÿ किठजाते हैं। मूल रूप से पà¥à¤°à¥€à¤¨à¥‡à¤Ÿà¤² टेसà¥à¤Ÿ दो तरह के होते हैं, जो इस पà¥à¤°à¤•ार हैं (4):
सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग टेसà¥à¤Ÿ : इस पà¥à¤°à¤•ार के टेसà¥à¤Ÿ पहली और दूसरी तिमाही में किठजाते हैं। पहली तिमाही में अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड किया जाता है। साथ ही कà¥à¤› बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ à¤à¥€ होते हैं। वहीं, दूसरी तिमाही में यह गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पर निरà¥à¤à¤° करता है कि उसका सिरà¥à¤« बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ ही किया जाना है या फिर सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग टेसà¥à¤Ÿ à¤à¥€ होगा। इसका निरà¥à¤£à¤¯ डॉकà¥à¤Ÿà¤° ही लेते हैं। इन टेसà¥à¤Ÿ के जरिठकà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® के सà¥à¤¤à¤° का पता लगाया जाता है। कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® में असामानता नजर आने पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° अनà¥à¤¯ टेसà¥à¤Ÿ के लिठबोल सकते हैं। यहां हम बता दें कि विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के जीन के समà¥à¤¹ को कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® बोला जाता है।
डायगà¥à¤¨à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• टेसà¥à¤Ÿ : वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• शोध पर à¤à¤°à¥‹à¤¸ करें, तो à¤à¤¸à¤¾ माना जाता है कि डायगà¥à¤¨à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• टेसà¥à¤Ÿ के परिणाम 99.9 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ तक सही होती हैं। इनके जरिठपता लग सकता है कि à¤à¥à¤°à¥‚ण में कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® से संबंधित को विकार है या नहीं। ये टेसà¥à¤Ÿ दो तरह के होते हैं। पहला कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (सीवीà¤à¤¸) और दूसरा à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸à¥‡à¤‚टेसिस है।
आइà¤, अब गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की पहली तिमाही में होने वाले टेसà¥à¤Ÿ के बारे में जानते हैं।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की पहली तिमाही में कौन से टेसà¥à¤Ÿ होते हैं?
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की पहली तिमाही à¤à¥à¤°à¥‚ण के लिठसबसे अहम होती है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° इस दौरान कई पà¥à¤°à¤•ार के परहेज के साथ ही लंबी यातà¥à¤°à¤¾ न करने की सलाह देते हैं। इस दौरान गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला के कà¥à¤› टेसà¥à¤Ÿ किठजाते हैं। अगर इन टेसà¥à¤Ÿ में किसी पà¥à¤°à¤•ार की समसà¥à¤¯à¤¾ या बीमारी की आशंका होती है, तो फिर अनà¥à¤¯ टेसà¥à¤Ÿ किठजाते हैं। यहां हम बता रहे हैं कि पहली तिमाही में कौन-कौन से टेसà¥à¤Ÿ होते हैं:
अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड : गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की दूसरी तिमाही में अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड और विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से किया जाता है। इसे शिशॠकी शरीरिक रचना का संपूरà¥à¤£ सरà¥à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤£ कहा जाता है। इसमें शिशॠके सिर से लेकर पैर तक को चेक किया जाता है। इस अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड में शिशॠके विकसित हो चà¥à¤•ी आंखें, हाथ-पैर की उंगलियों आदि को देखा जा सकता है। साथ ही अगर कोई समसà¥à¤¯à¤¾ है, तो उसे à¤à¥€ चेक किया जा सकता है (9)।
à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸à¥‡à¤‚टेसिस परीकà¥à¤·à¤£: à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸à¥‡à¤‚टेसिस à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार की डायगà¥à¤¨à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• परीकà¥à¤·à¤£ है। इस परीकà¥à¤·à¤£ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ का à¤à¤• छोटा-सा नमूना लेते हैं। à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• तरल पदारà¥à¤¥ से à¤à¤°à¥€ à¤à¤• थैली होती है, जिसमें शिशॠसà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रहता है। यह परीकà¥à¤·à¤£ गà¥à¤£à¤¸à¥‚तà¥à¤° समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का निदान करने और तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा टà¥à¤¯à¥‚ब दोष (NTDs) पता लगाने के लिठकिया जाता है। इसके तहत पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग टेसà¥à¤Ÿ à¤à¥€ किया जाता है, जिसके बारे में नीचे बताया गया है (10):
पà¥à¤²à¤¾à¤œà¥à¤®à¤¾ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग (PAPP-A) : यह à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ ही होता है, जिसका निरà¥à¤®à¤¾à¤£ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ होता है। इसमें किसी à¤à¥€ तरह की असमानता कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ की ओर इशारा करती है। यह टेसà¥à¤Ÿ 8 से 14 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के बीच में किया जाता है।
हà¥à¤¯à¥‚मन कोरियोनिक गोनाडोटà¥à¤°à¥‹à¤ªà¤¿à¤¨ परीकà¥à¤·à¤£ (hCG) : यह गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बनाया गया à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ है। इस हारà¥à¤®à¥‹à¤¨ का असामानà¥à¤¯ सà¥à¤¤à¤° कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤® जैसी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का कारण बन सकता है।
कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (सीवीà¤à¤¸): यह टेसà¥à¤Ÿ à¤à¥à¤°à¥‚ण में किसी पà¥à¤°à¤•ार के बरà¥à¤¥ डिफेकà¥à¤Ÿ, आनà¥à¤µà¤‚शिक विकार व गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में किसी पà¥à¤°à¤•ार की समसà¥à¤¯à¤¾ का पता लगाने के लिठकिया जाता है। इस टेसà¥à¤Ÿ के तहत कोरियोनिक विली के कà¥à¤› सैंपल लिठजाते हैं। कोरियोनिक विली मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ की दीवार से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा के छोटे-छोटे हिसà¥à¤¸à¥‡ होते हैं। इनका निरà¥à¤®à¤¾à¤£ निषेचित अंडों से होता है। यही कारण है कि इनकी मदद से आनà¥à¤µà¤‚शिक विकार का पता चल सकता है। यह टेसà¥à¤Ÿ वैलà¥à¤ªà¤¿à¤• होता है, इसलिठसंà¤à¤µ नहीं कि हर गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला का यह टेसà¥à¤Ÿ हो।
यह टेसà¥à¤Ÿ 10वें से 12वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के बीच में किया जाता है और दो तरह का होता है। गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ के जरिठकिठजाने वाले टेसà¥à¤Ÿ को टà¥à¤°à¤¾à¤‚ससरà¥à¤µà¤¿à¤•ल (transcervical) और पेट के जरिठकिठजाने वाले टेसà¥à¤Ÿ को टà¥à¤°à¤¾à¤‚सà¤à¤¬à¥à¤¡à¥‰à¤®à¤¿à¤¨à¤² (transabdominal) कहा जाता है (8)।
पहली तिमाही के बाद अब हम दूसरी तिमाही के बारे में बात करेंगे।
पà¥à¤°à¥‡à¤—नेंसी की दूसरी तिमाही में कौन से टेसà¥à¤Ÿ होते हैं?
दूसरी तिमाही पà¥à¤°à¥€à¤¨à¥‡à¤Ÿà¤² सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग के तहत कई रकà¥à¤¤ परीकà¥à¤·à¤£ शामिल हो सकते हैं। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मलà¥à¤Ÿà¥€à¤ªà¤² मारà¥à¤•र सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग कहा जाता है। इनके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कà¥à¤› आनà¥à¤µà¤‚शिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ या जनà¥à¤® दोषों के जोखिम के बारे में पता लगाया जा सकता है। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के 15वें से 20वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के बीच गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला के रकà¥à¤¤ का नमूना लेकर सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग की जाती है। इसके लिठगरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के 16वें से 18वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ को आदरà¥à¤¶ माना जाता है। इस दौरान निमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के टेसà¥à¤Ÿ किठजाते हैं :
अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड : गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की दूसरी तिमाही में अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड और विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से किया जाता है। इसे à¤à¥à¤°à¥‚ण की शरीरिक रचना का संपूरà¥à¤£ सरà¥à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤£ कहा जाता है। इसमें à¤à¥à¤°à¥‚ण के सिर से लेकर पैर तक को चेक किया जाता है। इस अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड में à¤à¥à¤°à¥‚ण के विकसित हो चà¥à¤•ी आंखें, हाथ-पैर की उंगलियों आदि को देखा जा सकता है। साथ ही à¤à¥à¤°à¥‚ण को अगर कोई समसà¥à¤¯à¤¾ है, तो उसे à¤à¥€ चेक किया जा सकता है (9)।
à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸à¥‡à¤‚टेसिस परीकà¥à¤·à¤£: à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤¸à¥‡à¤‚टेसिस à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार की डायगà¥à¤¨à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• परीकà¥à¤·à¤£ है। इस परीकà¥à¤·à¤£ में डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ का à¤à¤• छोटा-सा नमूना लेते हैं। à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• तरल पदारà¥à¤¥ से बनी à¤à¤• थैली होती है, जिसमें शिशॠसà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रहता है। यह परीकà¥à¤·à¤£ गà¥à¤£à¤¸à¥‚तà¥à¤° समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का निदान करने और तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा टà¥à¤¯à¥‚ब दोष (ONTDs) पता लगाने के लिठकिया जाता है। इसके तहत पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग टेसà¥à¤Ÿ à¤à¥€ किया जाता है, जिसके बारे में नीचे बताया गया है (10):
अलà¥à¤«à¤¾-फेटोपà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग (à¤à¤à¤«à¤ªà¥€) : यह à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ होता है। इसके जरिठगरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ के खून में मौजूद अलà¥à¤«à¤¾-फेटोपà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ के सà¥à¤¤à¤° को मापता है। à¤à¤à¤«à¤ªà¥€ à¤à¤• पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ है, जो सामानà¥à¤¯ रूप से à¤à¥à¤°à¥‚ण के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बनाया जाता है। यह à¤à¥à¤°à¥‚ण के आसपास होने वाले तरल पदारà¥à¤¥ यानी à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ में होता है। à¤à¤à¤«à¤ªà¥€ बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ को à¤à¤®à¤à¤¸à¤à¤à¤«à¤ªà¥€ (मेटेरनल सीरम à¤à¤à¤«à¤ªà¥€) à¤à¥€ कहा जाता है।
à¤à¤à¤«à¤ªà¥€ सà¥à¤¤à¤° का असामानà¥à¤¯ होना इस ओर संकेत करता है:
सà¥à¤ªà¤¾à¤‡à¤¨à¤² बिफिडा जैसे ओपन नà¥à¤¯à¥‚रल टà¥à¤¯à¥‚ब डिफेकà¥à¤Ÿ
डाउन सिंडà¥à¤°à¥‹à¤®
अनà¥à¤¯ गà¥à¤£à¤¸à¥‚तà¥à¤° समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚
à¤à¥à¤°à¥‚ण के पेट की दीवार में समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚
à¤à¤• से अधिक à¤à¥à¤°à¥‚ण
गà¥à¤²à¥‚कोज सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग : गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ की जांच के लिठगà¥à¤²à¥‚कोज सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग टेसà¥à¤Ÿ किया जाता है। यह गà¥à¤²à¥‚कोज सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग टेसà¥à¤Ÿ हर गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ के लिठअनिवारà¥à¤¯ है, à¤à¤²à¥‡ ही गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के पहले मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ की समसà¥à¤¯à¤¾ रही हो या फिर नहीं रही हो, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤§à¤¿ मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ यानि जेसà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨à¤² डायबिटीज होने की आशंका बनी रहती है। माना जाता है कि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤§à¤¿ मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ से सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ होने की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद शिशॠके रकà¥à¤¤ में शà¥à¤—र की मातà¥à¤°à¤¾ कम हो सकती है। अगर इस टेसà¥à¤Ÿ का परिणाम सकारातà¥à¤®à¤• आता है, तो अगले 10 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ में मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ होने का खतरा बना रहता है। इसलिà¤, गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के 6 हफà¥à¤¤à¥‡ बाद à¤à¤• बार फिर से गà¥à¤²à¥‚कोज सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग टेसà¥à¤Ÿ करवाना चाहिठ(11)।
आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल के आखिर में जानते हैं गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की तीसरी तिमाही में किठजाने वाले टेसà¥à¤Ÿ के बारे में।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की तीसरी तिमाही में कौन से टेसà¥à¤Ÿ होते हैं?
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की तीसरी तिमाही में किठजाने वाले टेसà¥à¤Ÿ के बारे में नीचे बताया गया है। ये सà¤à¥€ टेसà¥à¤Ÿ हर गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला के किठजाà¤à¤‚, यह संà¤à¤µ नहीं है। इनके होने या न होने का आधार पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर निरà¥à¤à¤° करता है (12)।
अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड: तीसरी तिमाही में अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड से पà¥à¤²à¥‡à¤¸à¥‡à¤‚टा की पोजीशन, à¤à¤®à¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ की मातà¥à¤°à¤¾ और शिशॠके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ का आकलन किया जाता है। साथ ही चेक किया जाता है कि बचà¥à¤šà¥‡ को परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ मिल रही है या नहीं। अगर किसी गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ को अधिक समसà¥à¤¯à¤¾ है, तो तीसरी तिमाही में उसके कई बार अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड हो सकते हैं।
गà¥à¤°à¥à¤ª बी सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤ª सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग: गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के 35वें से 37वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के बीच डॉकà¥à¤Ÿà¤° गà¥à¤°à¥à¤ª बी सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤ªà¥à¤Ÿà¥‹à¤•ोकस (जीबीà¤à¤¸) संकà¥à¤°à¤®à¤£ की जांच करते हैं। हालांकि, सà¤à¥€ गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ में यह जांच नही होती। जीबीà¤à¤¸ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ महिलाओं के मà¥à¤‚ह, गले व योनि में पाया जाता है। हालांकि, यह हानिकारक नहीं होता, लेकिन गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में यह मां और शिशॠदोनों के लिठसंकà¥à¤°à¤®à¤£ का कारण बन सकता है। जो होने वाले शिशॠको संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ कर सकता है। अगर टेसà¥à¤Ÿ पॉजिटिव आता है, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¤‚टीबायटिक दवा देते हैं, ताकि डिलीवरी के समय शिशॠको संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ होने से बचाया जा सके।
नॉनसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ टेसà¥à¤Ÿ (NST): इसके जरिठà¤à¥à¤°à¥‚ण की हृदय गति और सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की जांच की जाती है। नॉनसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ टेसà¥à¤Ÿ (NST) तब किया जाता, जब गरà¥à¤ में शिशॠकी हलचल सामानà¥à¤¯ हो या फिर गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ की डिलीवरी डेट निकल गई हो और पà¥à¤°à¤¸à¤µ पीड़ा न शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤ˆ हो। अगर कोई गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला अधिक जोखिम में है, तो यह टेसà¥à¤Ÿ हर हफà¥à¤¤à¥‡ किया जा सकता है।
कांटà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤¶à¤¨ सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥ˆà¤¸ टेसà¥à¤Ÿ: इस परीकà¥à¤·à¤£ को यह निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ करने के लिठकिया जाता है कि बचà¥à¤šà¤¾ जनà¥à¤® के समय होने वाले संकà¥à¤šà¤¨ का कितनी अचà¥à¤›à¥€ तरह से सामना करेगा। इसका उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ संकà¥à¤šà¤¨ को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करना है। साथ ही कारà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¥‹à¤•ोगà¥à¤°à¤¾à¤« का उपयोग करके बचà¥à¤šà¥‡ की हृदय गति चेक की जाती है।
आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल के माधà¥à¤¯à¤® से हमने आपको गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में होने वाले लगà¤à¤— सà¤à¥€ टेसà¥à¤Ÿ के बारे में विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से समà¤à¤¾à¤¨à¥‡ का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया है। फिर à¤à¥€ यह तय करने के लिठकि आपके लिठकौन से परीकà¥à¤·à¤£ सही हैं, अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° बात करें। वह आपकी अवसà¥à¤¥à¤¾ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° ही तय करेंगे कि आपको किस पà¥à¤°à¤•ार के टेसà¥à¤Ÿ की जरूरत है। आप गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान हमेशा पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ रहें और पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सेवन करें।
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